नोटबंदी के फैसले के बाद हो रही कैश की समस्या के चलते पत्रकारों को जिंदा जलाने की घटना सामने आई है। उत्तरप्रदेश के फैजाबाद में एक पेट्रोल पंप के कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने चार पत्रकारों को जिंदा जलाकर मारने की कोशिश की। ये चारों वहां के एक हिंदी अखबार दैनिक जागरण में काम करते हैं। पत्रकार पेट्रोल पंप पर झगड़ा होने के बाद पास ही में अपने दफ्तर में जाकर छिप गए थे। लेकिन पेट्रोल पंप का स्टाफ वहां भी पहुंच गया और ऑफिस के अंदर घुसकर पत्रकारों और बाकी स्टाफ से साथ भी मारपीट की। बाद में किसी ने पुलिस को सूचना दी। उसके बाद जाकर मामला शांत हुआ।

पत्रकार ऑफिस के पास वाले पेट्रोल पंप पर पेट्रोल भरवाने गया था। उसे 200 रुपए का पेट्रोल भरवाना था। इसके लिए उसने 10-10 के बीस सिक्के पेट्रोल भर रहे शख्स को देने चाहे। लेकिन उसने उनको लेने से मना कर दिया और कहा कि उसे नोट चाहिए और वह सिक्के नहीं लेगा।जब पत्रकार ने उससे वजह जाननी चाही तो वह लड़ने लगा। लड़ाई कुछ ही देर में हाथापाई पर पहुंच गई। जिन पत्रकारों पर हमला हुआ उसमें से एक का नाम कृष्ण कांत गुप्ता है। उन्होंने कहा, ‘मेरे कुछ दोस्त झगड़े की सुनकर पेट्रोल पंप की तरफ आए थे। उन लोगों को देखकर पेट्रोल पंप के स्टाफ ने उनके ऊपर पेट्रोल छिड़क दिया और उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश की।’

भारत के कई राज्य पत्रकारों के लिहाज से सुरक्षित नहीं कहे जा सकते। 12 नंवबर को बिहार में हिंदी के अखबार दैनिक भास्कर के पत्रकार की कुछ अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके अलावा भी ऐसे कई किस्से मौजूद हैं। इससे पहले मई में हिंदी के अखबार हिंदुस्तान के सीनियर पत्रकार राजदेव रंजन को सिवान जिले में गोली मारी गई थी। सीबीआई अबतक उस केस की जांच कर रही है। इस साल (2016) दुनियाभर में कम से कम 57 पत्रकार अपना दायित्व निभाते हुए मारे गए हैं। यह रिपोर्ट प्रेस स्वतंत्रता समूह ‘रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स’ ने दी थी।

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