‘एनडीटीवी पर बैन: मीडिया की हत्या मत करो’
 
भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एनडीटीवी को एक दिन के लिए आफ़ एयर करने का आदेश दिया है.
भारत सरकार के समाचार चैनल एनडीटीवी को एक दिन के लिए ऑफ़ एयर करने की सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हो रही है. सरकार ने पठानकोट हमलों की कवरेज के दौरान संवेदनशील जानकारियां देने के आरोप में ये प्रतिबंध लगाया है. कई पत्रकारों ने इस पर अपना विरोध जताया है.
पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लिखा, “भारत के सबसे संयमित और ज़िम्मेदार चैनलों में से एक एनडीटीवी इंडिया को प्रसारण मंत्रालय एक दिन के लिए बंद कर रहा है. आज एनडीटीवी है, कल कौन होगा?
सगारिका घोष ने ट्वीट किया, “एनडीटीवी को प्रतिबंधित करना स्वतंत्र मीडिया पर सरकार का चौंकाने वाला शक्ति प्रदर्शन है. मीडिया की हत्या मत करो.”
पत्रकार सिद्धार्थ वर्दराजन ने ट्वीट किया, “एनडीटीवी पर सरकार का एक दिन का प्रतिबंध सरकार की मनमानी और ताक़त का दुर्भावनापूर्ण उपयोग है. एनडीटीवी को इसे अदालत में चुनौती देनी चाहिए.
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कांग्रेस से जुड़े तहसीन पूनावाला ने लिखा, “अगर एनडीटीवी ऑफ़ एयर हुआ तो मैं प्रधानमंत्री आवास के बाहर बैठकर ऑनलाइन एनडीटीवी देखूंगा.”
वहीं कुछ लोगों ने इसे अघोषित आपातकाल तक कहा है.
सुख संधू ने लिखा, “बीजेपी सरकार ने मीडिया चैनलों को सलाह दी है, धमकियां दी हैं और अब प्रतिबंध भी लगा दिया है. भारत में आपातकाल जैसे हालात हैं.”
डॉ. मुग्धा सिंह ने ट्वीट किया, “एनडीटीवी को एक दिन के लिए ऑफ़ एयर होना पड़ेगा, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ शक्तिहीन हो गया है. हिटलरशाही लौट रही है, इस बार मोदी सरकार के नाम से.”
रचित सेठ लिखते हैं, “सरकार पठानकोट पर जाँच के लिए आईएसआई को ख़ुशी-ख़ुशी बुला सकती है, लेकिन अगर एनडीटीवी इंडिया या कोई और चैनल इस बारे में ख़बर दिखाता है तो उन्हें इससे समस्या है.”
अपरा वैद्य ने ट्वीट किया, “अभी सरकार को तीन साल भी नहीं हुए हैं और हम आपातकाल के काले दौर में पहुँच गए हैं.”
इकराम वारसी ने ट्वीट किया, “एनडीटीवी अघोषित आपातकाल का सामना कर रहा है.”
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एनडीटीवी पर अपनी कवरेज में पठानकोट हमले के दौरान संवेदनशील जानकारी लीक करने के आरोप हैं.
जग्दीश्वर चतुर्वेदी ने फ़ेसबुक पर लिखा, “सवाल यह है पठानकोट की घटना पर एनडीटीवी के अलावा दूसरे टीवी चैनलों की रिपोर्टिंग क्या सही थी? मोदी सरकार पारदर्शिता का प्रदर्शन करे और बताए कि एनडीटीवी के कवरेज में किस दिन और समय के कार्यक्रम को आधार बनाकर और किन मानकों के आधार पर फैसला लिया गया और एनडीटीवी से उसका पक्ष जानने की कोशिश की गयी या नहीं?”
गिरीश मालवीय ने फ़ेसबुक पर लिखा, “यह आपातकाल की आहट है, इसे अनसुना करना बेहद ख़तरनाक है, आज एनडीटीवी पर एक दिन का प्रतिबंध लगाया गया है कल किसी और पेपर को बंद कर देंगे परसों कहेंगे कि इंटरनेट से ही सूचनाए फैलती है उसे ही बंद कर दो.”
कुछ लोगों ने एनडीटीवी पर प्रतिबंध का स्वागत भी किया है.
तेजिंदर पाल बग्गा ने ट्वीट किया, “एनडीटीवी की पठानकोट हमलों की लाइव कवरेज के दौरान दी गई अहम जानकारियां चरमपंथियों के हाथ में भी आ सकती थी जिससे लोगों की जान ख़तरे में पड़ सकती थी.”
राहुल सिंगला ने लिखा, “एनडीटीवी की सज़ा तीस दिनों से कम करके एक दिन कर दी गई है. लेकिन क्यों. एनडीटीवी को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए, हमे इसकी ज़रूरत नहीं है.”
संदीप शर्मा ने फ़ेसबुक पर लिखा, “पत्रकारिता जगत पर काले धब्बे जैसा है एनडीटीवी पर प्रतिबंध लगना.”

2 COMMENTS

  1. राष्ट्रहितापेक्षा पत्रकारिता महत्वाची नाही

    • एनडीटीव्हीवरील कारवाई दहा महिन्यांनी होत आहे.राष्ट्रहित धोक्यात आले हे सरकारला दहा महिन्यांनी कळले यावरून राष्ट्रहिताबद्दल सरकार किती जागरूक आहे ते दिसते आहे.केवळ मिडियांना धमकाविण्याचा हा प्रकार आहे.चॅनल्सनं देशद्रोह केला तर ते कायमचे बंद करा याबाबत कुणाचं दुमत असणार नाही पण अशा धमक्या चालणार नाहीत हे सरकारनं लक्षात घ्यावं.

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