शाहजहांपुर में पत्रकार की जलाकर की गई हत्या की आग अभी शांत भी नहीं हुई थी कि कानपुर के नौबस्ता इलाके में एक प्रिंट मीडिया के पत्रकार दीपक मिश्रा को गोली मार दी गई. घटना में दीपक को दो गोली लगी. उन्हें गंभीर हालत में हैलट अस्पताल में भर्ती कराया गया. उनकी हालत नाजुक बनी हुई है. दीपक दैनिक मेरा सच अखबार में काम करते थे. आपरेशन के बाद उनकी हालत स्थिर बनी हुई है. दीपक ने क्षेत्र के कुछ जुएबाज दबंगों की पुलिस से शिकायत की थी और उनके अड्डे की पहचान बताई थी. एसएसपी शलभ माथुर ने देर रात अस्पताल पहुंचकर घायल का हाल जाना और दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया. एसएचओ नौबस्ता ने घटनास्थल का जायजा ले उच्च अधिकारियों को अवगत कराया.

घटना कल देर रात 11:30 बजे की है. पत्रकार दीपक अपनी डयूटी खत्म करके वापस अपने घर आ रहा था. कानपुर के नौबस्ता थाना क्षेत्र में पत्रकार दीपक मिश्रा को अपराधियो ने पांच गोली मारी जिसमें दो गोली दीपक मिश्रा को लगी. दो बाइक सावर चार लोगों ने दीपक की गाड़ी के सामने अपनी गाड़ी लगा दी और उससे मारपीट करने लगे. शोर मचाने पर एक युवक ने अपने पास से तमंचा निकाल कर फायर कर दिया जिससे दीपक मिश्र वही गिर पड़े. गोली की आवाज सुनकर लोग अपने घरो से बाहर आ गए  इसके बाद हमलावर वहां से फरार हो गए. दीपक का कहना है कि कुछ लोग वहां जुआ का धंधा चलाते हैं. इसका विरोध करने पर कई बार इन लोगों ने हमें देख लेने की धमकी भी दी थी. साल 2013 में इसी को लेकर नौबस्ता थाने में इनकी शिकायत की कई थी. दीपक के अनुसार जब भी ये लोग मिलते थे, देख लेने की धमकी देते थे.

उल्लेखनीय है कि शाहजहांपुर के रहने वाले पत्रकार जगेंद्र सिंह ने फेसबुक पर मंत्री के खिलाफ आवाज उठाई तो पहले मंत्री के गुर्गों ने पत्रकार को धमकी दी. इसके बाद भी जगेंद्र ने मंत्री के खिलाफ लिखना नहीं बंद किया. इसके बाद मंत्री ने जगेंद्र पर जानलेवा हमला करवाया. इस हमले में जगेंद्र की टांग तक टूट गई. जगेंद्र की हिम्मत फिर भी नहीं टूटी. आरोप है कि इसके बाद राममूर्ति वर्मा के इशारे पर उस पत्रकार के खिलाफ अपहरण, हत्या और लूट के प्रयास की एफआईआर दर्ज करा दी गई. इससे भी जब मंत्री जी का मन नहीं भरा तो राम मूर्ति वर्मा ने लाल बत्ती की आड़ में कोतवाल को अपने साथ मिलाकर जगेंद्र पर पेट्रोल डालकर जिंदा जला डालने का प्रयास किया. इस घटना में जगेंद्र 60 फीसदी तक जल गया था. मरने से पहले पत्रकार ने कहा था कि उसके पास मंत्री के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं और इसी के चलते उसकी जान लेने के प्रयास किए गए. जगेंद्र जब लखनऊ के सिविल अस्पताल में भर्ती था तब आईजी अमिताभ ठाकुर भी उससे मिलने पहुंचे थे. उन्‍होंने जगेंद्र की लड़ाई को जिंदा रखने का आश्वासन दिया था. अमिताभ ठाकुर ने कटघरे में आए मंत्री के खिलाफ भी जांच की मांग की थी.

यूपी में दस दिन के भीतर दो पत्रकारों पर हमले हो चुके हैं. शाहजहांपुर में हत्या तो कानपुर में जानलेवा हमला हुआ है. शाहजहांपुर में तो पत्रकार की हत्या में पिछ़ड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा का नाम आया है. लेकिन अखिलेश यादव की पुलिस ने न तो आरोपी मंत्री को गिरफ्तार किया है और ना ही अखिलेश यादव ने मंत्री को अब तक हटाया है. आरोप है कि मंत्री के खिलाफ फेसबुक पर खबर लिखने के बाद पत्रकार जगेंद्र से मारपीट की गई. एक जून को दारोगा ने घर जाकर जगेंद्र से मारपीट की और जिंदा जला दिया. अस्पताल में जगेंद्र की मौत हो गई. मरने से पहले जगेंद्र ने अपना बयान दर्ज कराया था. लेकिन न तो पुलिस मंत्री को गिरफ्तार कर पाई है और ना ही अखिलेश यादव ने उन्हें हटाया है. हालांकि मंत्री इस मामले में खुद को निर्दोष बता रहे हैं. कानपुर में स्थानीय अखबार के पत्रकार दीपक मिश्रा को बदमाशों ने गोली मार कर जख्मी कर दिया. बताया जा रहा है कि जुए का अड्डा पकड़वाने की वजह से दीपक को बदमाशों ने निशाना बनाया है.

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