साल 2014 में विश्व भर में कम से कम 60 पत्रकार काम करते हुए या अपने काम के कारण मारे गये और उनमें से 44 प्रतिशत को हत्या के लिए निशाना बनाया गया.

न्यूयार्क स्थित संस्था कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट ने एक नयी रिपोर्ट में बताया है कि मारे गये पत्रकारों में लगभग एक चौथाई अंतरराष्ट्रीय पत्रकार थे. हालांकि, धमकी मिलने वालों में भारी संख्या में स्थानीय पत्रकार शामिल रहे हैं.

2014 में मारे जाने वालों में एसोसिएट प्रेस का एक फोटो पत्रकार अंजा नैडरिंगउस भी शामिल हैं जिनकी अफगानिस्तान चुनाव के समय कवरेज के दौरान हत्या कर दी गयी थी.

सीपीजे की आज जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि 2014 में मारे गये पत्रकारों की संख्या पिछले साल मारे गये 70 पत्रकारों की संख्या से कम है. लेकिन संगठन द्वारा 1992 के बाद से रखे जा रहे आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन सालों में यह सबसे घातक है.

अपने चौथे साल में प्रवेश कर चुका सीरिया का तीव्र संघर्ष पत्रकारों के मारे जाने में एक बड़ा कारक रहा है. रिपोर्ट में बताया गया है कि वहां पर इस साल कम से कम 17 पत्रकार मारे गये और 2011 में संघर्ष शुरू होने के बाद से वहां पर कम से कम 79 पत्रकार मारे गये हैं.

सीरिया में इस साल दो पत्रकारों की नृशंस हत्या कर दी गयी. इस्लामिक स्टेट समूह ने अमेरिकी स्वतंत्र पत्रकार जेम्स फोली और स्टीवन सोटलोफ की सिर काट हत्या कर दी थी. जेम्स फोली और स्टीवन सोटलोफ दोनों संघर्ष के दौरान रिपोर्टिंग करते समय गायब हो गये थे.

यूक्रेन में नयी सरकार और रूस समर्थित अलगाववादियों के बीच संघर्ष में पांच पत्रकार और दो मीडिया कर्मियों की हत्या कर दी गयी. इसके कारण शीत युद्ध के बाद रूस और पश्चिमी देशों के बीच रिश्ता सबसे नीचले स्तर पर पहुंच गया.

गाजा में इस्राइल और फलस्तीनियों के बीच गर्मियों के दिनों में 50 दिनों तक हुये संघर्ष में कम से कम चार पत्रकारों सहित सात मीडिया कर्मी मारे गये जिसमें एपी के वीडियो पत्रकार सिमोन कामिली और अनुवादक अली शेहदा अबू अफाश बचे हुये आयुध में हुये विस्फोट के कारण मारे गये.

इराक में, कम से कम पांच पत्रकार मारे गये. इनमें से तीन की मौत इस्लामिक स्टेट समूह को देश के उत्तरपश्चिम से खदेड़ने के लिए युद्ध के समय कवरेज के दौरान हुयी.

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