मजिठिया ः 25 ला मुंबईत सुनावणी

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    मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसा में गड़बड़ झाला कर माननीय सुप्रीम कोर्ट की आंखों में धूल झोकते हुये फर्जी रिपोर्ट भेजे जाने के मामले से जुड़े मुंबई के श्रम आयुक्त के यहां दायर एक आरटीआई का गोलमोल जवाब देना खुद श्रम आयुक्त मुंबई को भारी पड़ने वाला है। मुंबई के निर्भीक पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट शशिकांत सिंह ने आरटीआई से प्राप्त प्रमोशन मामले से जुड़े एक सूचना पर असंतुष्ट होकर श्रम आयुक्त कार्यालय में अपील दायर कर पूछा है कि अगर आपके पास मजीठिया मामले के लिये महत्वपूर्ण प्रमोशन लिस्ट नहीं है तो आपके विभाग द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट को किस आधार पर मजिठिया वेज बोर्ड के क्रियान्यवयन की रिपोर्ट भेजी गयी है। इस अपील को स्वीकार कर लिया गया है और इस पर २५ अप्रैल को दोपहर मेंश्रम आयुक्त कार्यालय मुंबई शहर के प्रथम अपील अधिकारी के समक्ष सुनवाई होनी है।

    भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 11 नवम्बर 2011 को भारत के राजपत्र में अधिसूचना संख्या 2532 (अ) में अधिसूचित्त आदेश दिया है जिसके मुताबिक 10 वर्ष की सेवा संतोषजनक करने पर पदोन्नति का प्रावधान है। यानि अगर आप दस साल से ज्यादा समय से एक ही समाचार पत्र प्रतिष्ठान में कार्यरत हैं तो आपको एक प्रमोशन मिलना चाहिए था। इसी आदेश में पूरे सेवाकाल में तीन प्रमोशन की बात है। यानी अगर आप 20 साल से ज्यादा समय से काम कर रहे हैं एक ही समाचार पत्र या उस प्रतिष्ठान में तो आपको दो प्रमोशन मिलना चाहिए था जो कि समाचार पत्र प्रबंधन ने नहीं दिया है। इस बारे में मुम्बई के श्रम आयुक्त कार्यालय के पास भी इस बाबत कोई सूचना उपलब्ध नहीं है। मुम्बई के निर्भीक पत्रकारऔर आरटीआई एक्टीविस्ट  शशिकांत सिंह ने मुम्बई शहर के श्रम आयुक्त कार्यालय के जन माहिती अधिकारी से ये जानकारी माँगा कि मुम्बई के कौन कौन से समाचार पत्रों ने मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक अपने उन समाचार पत्र कर्मियों और पत्रकारों को जो दस साल से अधिक समय से एक ही समाचार पत्र प्रतिष्ठान में कार्यरत हैं, को प्रमोशन दिया है।

    पूरी सूची शशिकांत सिंह ने एक मार्च को माँगा था जिस पर श्रम आयुक्त कार्यालय ने 9 मार्च 2016 को तीन लाइन का एक जवाब भेजा था कि ये जानकारी हमारे कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। जबकि मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर भारत सरकार ने इसे राजपत्र में अधिसूचित किया है और उसमे प्रमोशन की भी चर्चा है। अब सवाल ये उठता है कि अगर श्रम आयुक्त कार्यालय के पास ऐसी कोई सूची नहीं है तो फिर माननीय सुप्रीम कोर्ट को किस आधार पर रिपोर्ट सौपी गयी है। आरटीआई से प्राप्त इस जानकारी से मुंबई के निभीक पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट  शशिकांत सिंह ने असहमति जतायी और इस मामले पर अपील दायर कर दिया। इस अपील को स्वीकार कर लिया गया है और इस पर २५ अप्रैल को दोपहर मेंश्रम आयुक्त कार्यालय मुंबई शहर के प्रथम अपील अधिकारी के समक्ष सुनवाई होगी। अब देखना है कि इस रिर्पोट के फर्जीवाड़े पर श्रम आयुक्त कार्यालय अपना क्या पक्ष रखता है।

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