पेड न्यूज दंडनीय अपराध ?

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पेड न्यूज दंडनीय अपराध ?

देशातील पत्रकारांवरील वाढत्या हल्ल्याच्या विरोधात पत्रकार संघटीतपणे आवाज उठवत असताना आणि पत्रकार संरक्षण कायदा करावा अशी मागणी जोरदारपणे होत असताना सरकार त्याकडे दुर्लक्ष करीत असले तरी पेड न्यूजच्या बाबतीत मात्र सरकार नवा कायदा करायला निघाले त्यासंबंधीच्या हालचाली दिल्लीत सुरू झाल्या आहेत.त्या संबंधीची एका पोर्टलवरची ही बातमी बघा –

सूचना और प्रसारण मंत्रालय पेड न्यूज के चलन पर रोकथाम के लिए एक व्यापक प्रणाली की योजना बना रहा है और उसने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम तथा प्रेस काउंसिल अधिनियम में संशोधन से जुड़े मुद्दों के अध्ययन के लिए कानून मंत्रालय को नोट भेजे हैं।
सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ द्वारा रखे गये एक वक्तव्य में मंत्रालय ने कहा कि कानून मंत्रालय के अध्ययन के आधार पर विषयों पर आगे और विचार किया जाएगा तथा जरूरत पड़ने पर कैबिनेट की मंजूरी के लिए प्रस्ताव दिया जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार कानून मंत्रालय को पेड न्यूज को दंडनीय चलन बनाने के लिहाज से जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन के प्रस्ताव पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय को नोट देने को कहा गया है।पेड न्यूज की शिकायतों पर फैसला करने के लिए तथा मामले में अंतिम निर्णय के लिए भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) को पूरे अधिकार देने के मामले में भी कानून मंत्रालय से अध्ययन को कहा गया है।
बयान में कहा गया है कि ‘प्रेस और पुस्तकों का पंजीकरण तथा प्रकाशन विधेयक’ पर सूचना प्रौद्योगिकी पर स्थाई समिति की सिफारिशों के आधार पर पेड न्यूज की घटनाओं की रोकथाम के लिए विधेयक में प्रावधानों को शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है।

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